छत्तीसगढ़ में 18 निगम-मंडल पदाधिकारियों को मंत्री दर्जा, 3 को कैबिनेट और 15 को राज्यमंत्री का प्रोटोकॉल
सरकार का बड़ा फैसला; अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला आयोग समेत कई संस्थाओं के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों को मिला मंत्री स्तर का दर्जा
रायपुर, 28 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने विभिन्न निगमों, मंडलों और आयोगों के 18 अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों को मंत्री पद का दर्जा देने का फैसला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार इनमें 3 पदाधिकारियों को कैबिनेट मंत्री और 15 को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है।
इन तीन पदाधिकारियों को मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा
सरकार के आदेश के मुताबिक—
- रामलाल चौहान — अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग
- रूप सिंह मंडावी — अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग
- डॉ. ममता साहू — अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग
को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है।
इन्हें मिला राज्य मंत्री का दर्जा
राज्य मंत्री का दर्जा पाने वाले पदाधिकारियों में गौरीशंकर श्रीवास, आनंद निषाद, राजेश कुमार राजपूत, राजेंद्र नायक, सुधीर गौतम, एजाज मिर्जा बेग, भोजराज देवांगन, प्रभात मिश्रा, सुषमा जेठानी और शशिकांत द्विवेदी शामिल हैं।
इसके अलावा पांच उपाध्यक्षों को भी राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है। इनमें डॉ. जेपी शर्मा, किशोर महानंद, आनंद कुमार तिवारी (राजीव लोचन दास महाराज), वेदराम मनहरे और मंगलदास ठाकुर शामिल हैं।
मंत्री दर्जा मिलने का क्या मतलब?
यह दर्जा संबंधित पदाधिकारियों को उनके मौजूदा पद के साथ प्रोटोकॉल और शिष्टाचार के स्तर पर मंत्री जैसी सुविधाएं एवं सम्मान प्रदान करता है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन पदाधिकारियों को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है या उन्हें वास्तविक मंत्री के तौर पर विभागीय अधिकार मिल गए हैं।
कई क्षेत्रों से जुड़े पदाधिकारियों को मिला दर्जा
सरकार के इस फैसले में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला आयोग के अलावा शिक्षा, हज, हथकरघा, राजभाषा, सिंधी अकादमी, सहकारिता, गौ सेवा और अन्य क्षेत्रों से जुड़े संस्थानों के पदाधिकारी शामिल हैं।
आदेश जारी होने के बाद संबंधित पदाधिकारियों को सरकारी कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में उनके नए प्रोटोकॉल के अनुरूप दर्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।












